मूर्ख राक्षस (जो न माने बड़न की सीख, लए कटोरा मांगे भीख।)
मूर्ख राक्षस
एक नगर में एक फारसी व्यापारी रहता था। उसके परिवार में पत्नी और दो बेटे रहते थे। एक दिन उसने अपने नगर से दूसरे नगर व्यापार करने की योजना बनाई । उसने अपनी पत्नी से रास्ते में खाना खाने के लिए कुछ रोटियां और आम के फल बधवालिए। अब व्यापारी दूसरे गांव की ओर निकल पड़ा। रास्ता काफी लम्बा होने के कारण वह थक गया था। एक नीम का पेड़ देखकर वह विश्राम करने और खाना खाने के उद्देश्य से नीम के पेड़ की छाया के नीचे बैठ गया और जो रोटियां और आम के फल साथ लिए थे।
उसने खाया और आम के फल की गुठलियां पास बने गड्ढे में फेक दी। उस गड्ढे में एक राक्षस ओर उसके बच्चे रहते थे, इतने में एक बड़ा राक्षस (दैत्य) उस गड्ढे से प्रकट हो गया और व्यापारी से बोला कि तुमने मेरे बेटे की हत्या आम की गुठलियों को मारकर की है। इसलिए मै अपने बेटे की हत्या का बदला तुम्हारी हत्या करके पूरा करूगां। व्यापारी के द्वारा बहुत क्षमा याचना करने पर राक्षस ने व्यापारी को माफ नहीं किया पर एक महिने कि मोहलत दे दी ताकि व्यापारी अपने नगर जाकर अपनी धन - संपत्ति को अपने बेटों में बराबर बांटकर राक्षस के पास वापिस लौट आए। यह काम करने के बाद व्यापारी एक महीने के बाद उस नीम के पेड़ के नीचे आकर अपने हाल को सोचकर विलाप (रोना) करने लगा। वहां से दो बुजुर्ग व्यक्ति गुजर रहे थे, एक बुजुर्ग व्यक्ति के पास जंजीर से बंधा सुंदर कुत्ता था, और दूसरे के पास घोड़ा था। व्यापारी को विलाप करते देख उन्होंने व्यापारी से पूछा क्या हुआ है जो तुम रो रहे हो। उसके साथ जो कुछ हुआ था। वह दोनों बुजुर्ग व्यक्तियों को बताया। यह सुनने के बाद बुजुर्ग व्यक्तियों ने उस व्यापारी का साहस जुटाया और कहा हम तुम्हारे प्राणों की रक्षा के लिए राक्षस को किसी भी तरह मनाएंगे । जब वहा पर राक्षस आया तो उन दोनों बुजुर्ग व्यक्तियों ने राक्षस से बात की ओर बोले हे! दैत्यों के दैत्य यदि हम आपको कहानी सुनाकर आश्चर्यचकित कर दे तो आप व्यापारी का सारा खून माफ कर देगें।
दैत्य ने उनकी बात स्वीकार कर ली। अब दोनों बुजुर्ग व्यक्तियों में से पहले बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी एक कहानी सुनाई और दैत्य ने कहा” आश्चर्यचकित करने वाली कहानी थी।“ उसके बाद दैत्य ने उस व्यापारी के आधे खून को माफ कर दिया।
दूसरे बुजुर्ग व्यक्ति के पास एक घोड़ा था। वह कहानी सुनाने के लिए दैत्य के पास गया। उसने कहा हे दैत्यों के सरदार तुमने जो पहली कहानियां सुनी हैं उनसे भी रोचक कहानी मेरे पास है। यदि आप कहानी कहने की अनुमति दे और कहानी आपको अच्छी लगे और आश्चर्यचकित कर दे तो आप इस व्यापारी का शेष खून माफ कर देना। दैत्य ने उसकी बात भी स्वीकार कर ली।
बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा हे दैत्यों के सरदार यह घोड़ा जिसे आप देख रहे हो यह घोड़ा नहीं बल्कि मेरी पत्नी है। एक बार की बात है, मै किसी कार्य से यात्रा पर गया था। जब एक वर्ष के बाद मैं यात्रा से घर वापस आया तो देखा कि मेरी पत्नी ने मेरे दास के साथ संबंध स्थापित कर लिये है। मेरी पत्नी ने जब मुझे देखा तो वह उठी और उसने पानी का एक मटका उठाया और उस पर एक मंत्र पढ़कर फूंक दिया और पानी मुझ पर छिड़क दिया। मैं एक कुत्ते में बदल गया और उसने मुझे घर से भगा दिया। मैं गली -कूचे में टहलता रहा। टहलते- टहलते मैं एक कसाई की दुकान पर जा पहुंचा।
कसाई ने मुझे खाने के लिए कुछ हड्डी दी। मैंने उसे खाया रात हो गयी थी क़साई अपने घर जाना चाह रहा था मैं भी उसके पीछे- पीछे चल पड़ा। जब क़साई के घर पहुंच गया तो जैसे ही कसाई की बेटी ने मुझे देखा उसने अपना चेहरा ढांक लिया और अपने बाप से कहा पिताजी घर में अपरिचित व्यक्ति को क्यों लाये हो? कसाई ने कहा मैं किसी अपरिचित व्यक्ति को घर नहीं लाया हूं। उसकी लड़की जादू मंतर जानती थी वह तुरंत जान गई कि यह कुत्ता नहीं एक व्यक्ति है। और कहा यह कुत्ता नहीं इंसान है इसकी पत्नी ने जादू से इसे कुत्ता बना दिया है। तो कसाई ने अपनी लड़की से पूछा क्या तुम इसे पुनः इंसान बना सकती हो। तब लड़की बोली हां, मैं इसे इसके पहले वाले रूप में वापस कर सकती हूं। तब कसाई ने अपनी लड़की से कुत्ते को पुनः इंसान बनने को कहा।
लड़की एक नीला मटका ले आयी और उस पर मंत्र फूंका और उसका पानी मेरे ऊपर छिड़क दिया मैं अपने पहले वाले रूप में लौट आया। कसाई की लड़की का मैंने आभार व्यक्त किया। मैंने उससे कहा कि मेरी पत्नी को घोड़े में परिवर्तित कर दे। उसने जो पानी मेरे ऊपर छिड़का था उसमें से थोड़ा सा पानी मुझे दिया और कहा जब तुम अपनी पत्नी को देखना तो यह पानी उस पर छिड़क देना और तुम जो भी चाहोगे उसमें वह बदल जायेगी।
मैंने पानी ले लिया और अपने घर वापस आ गया। जैसे ही मैंने अपनी पत्नी को देखा उस पर पानी छिड़क दिया और मैंने उसे घोड़े में बदलना चाहा और वह घोड़ा हो गयी। यह वही घोड़ा है। जब दैत्य ने यह कहानी सुनी तो वह आश्चर्य चकित रह गया। उसने घोड़े से पूछा कि यह कहानी सही है? घोड़े ने अपना सिर हिलाया और इस तरह से उसने बुजुर्ग व्यापारी की बात की पुष्टि की। दैत्य को बहुत आश्चर्य हुआ था उसने व्यापारी के शेष खून को माफ कर दिया। इस तरह व्यापारी की जान बच गयी।
शिक्षा - जो न माने बड़न की शीक, लए कटोरा मांगे भीक
(जो लोग बुजुर्गों की आज्ञा का पालन नहीं करते वे अपने जीवन में कभी ख़ुश नहीं रह पाते।)
अगर आपको हमारी कहानी बेहद पसन्द आई है तो आप हमें लाईक, शेयर और कॉमेंट जरूर करें
Zagat Razz
https://wordpress.com/posts/gyanjorhedyan.wordpress.com
https://wp.me/pbuUjT-O
मैं Zagat Razz :- Gyanjorhedyan का संस्थापक हूँ | हमें लेख लिखना व किताब पढ़ना बेहद पसंद है हम शिक्षा, कंप्यूटर, मोबाइल, सरकारी नौकरी, नई योजनाओं व इस प्रकार की अन्य कई जानकारी इस Wabsite पर लिखते है | आप हमें कोई लेख भेजना चाहो तो हमें सम्पर्क कर सकते है – zagatrazz4444@gmail.com@gmail.com
Nice 👍
ReplyDelete