मूर्ख राक्षस (जो न माने बड़न की सीख, लए कटोरा मांगे भीख।)
मूर्ख राक्षस एक नगर में एक फारसी व्यापारी रहता था। उसके परिवार में पत्नी और दो बेटे रहते थे। एक दिन उसने अपने नगर से दूसरे नगर व्यापार करने की योजना बनाई । उसने अपनी पत्नी से रास्ते में खाना खाने के लिए कुछ रोटियां और आम के फल बधवालिए। अब व्यापारी दूसरे गांव की ओर निकल पड़ा। रास्ता काफी लम्बा होने के कारण वह थक गया था। एक नीम का पेड़ देखकर वह विश्राम करने और खाना खाने के उद्देश्य से नीम के पेड़ की छाया के नीचे बैठ गया और जो रोटियां और आम के फल साथ लिए थे। उसने खाया और आम के फल की गुठलियां पास बने गड्ढे में फेक दी। उस गड्ढे में एक राक्षस ओर उसके बच्चे रहते थे, इतने में एक बड़ा राक्षस (दैत्य) उस गड्ढे से प्रकट हो गया और व्यापारी से बोला कि तुमने मेरे बेटे की हत्या आम की गुठलियों को मारकर की है। इसलिए मै अपने बेटे की हत्या का बदला तुम्हारी हत्या करके पूरा करूगां। व्यापारी के द्वारा बहुत क्षमा याचना करने पर राक्षस ने व्यापारी को माफ नहीं किया पर एक महिने कि ...